शंकराचार्य का जीवन परिचय-Shankaracharya ka jivan parichay

शंकराचार्य, भारतीय इतिहास में एक महान धार्मिक व्यक्ति थे जिन्होंने वेदांत दर्शन को जनता के बीच प्रसारित किया और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहरी चिंतनशीलता के साथ विचार किया। उनके जीवन का परिचय इस लेख में दिया गया है।

बचपन का परिचय

शंकराचार्य का जन्म एक संस्कृत ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका नाम शंकर था। वे बहुत ही बुद्धिमान एवं धार्मिक स्वभाव के थे। उनके बचपन के दौरान ही उन्हें वेद, उपनिषद और पुराणों का अध्ययन करने का शौक था।

विद्वता और यात्रा

शंकराचार्य के बढ़ते ज्ञान ने उन्हें वेदांत के अध्ययन के लिए विद्वता प्राप्त किया। उन्होंने ब्रह्मसूत्रों की व्याख्या की और वेदांत के विभिन्न सिद्धांतों को समझने के लिए भारत के अलग-अलग भागों में यात्राएँ की। उनके प्रवचनों का प्रभाव लोगों के दिलों पर ऐसा था कि उन्हें भारतीय धार्मिक दर्शन के जानकार रूप में पहचाना जाता है।

वेदांत दर्शन की प्रसारणा

शंकराचार्य के वेदांत दर्शन को लोगों के बीच फैलाने के लिए उन्होंने भारत के विभिन्न भागों में मठ और धर्मशालाएं स्थापित की। उन्होंने संस्कृत भाषा में लिखित ग्रंथों की रचना की जिनमें वेदांत दर्शन के सिद्धांतों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया था। इससे लोगों को वेदांत के गहरे तत्वों की समझ में आसानी होती थी।

समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान

शंकराचार्य ने अपने जीवन के दौरान समाज के विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया। उन्होंने विधवा और अनाथ बच्चों के लिए आश्रय स्थापित किए जो समाज के निर्मम्म सम्मान के अधीन थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति और धरोहर के प्रचार-प्रसार के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जिनसे लोगों को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव मिला।

निर्वाण प्राप्ति

शंकराचार्य ने अपने जीवन के अंत में संसार के सम्बन्धों से त्याग कर दिया और संन्यास लेने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने आध्यात्मिक सफलता के पथ पर अग्रसर होते हुए संसार की माया से मुक्त होकर निर्वाण प्राप्त किया।

समापन

इस लेख में हमने शंकराचार्य के जीवन परिचय को संक्षेप में प्रस्तुत किया है। उनके धार्मिक जीवन और वेदांत दर्शन के प्रसार के माध्यम से उन्होंने समाज को उत्तेजित किया और लोगों को धार्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया। आज भी उनके उपदेश और विचार संसार के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं।

1. शंकराचार्य को किस विषय में विशेषज्ञ माना जाता है?

शंकराचार्य को वेदांत दर्शन के विशेषज्ञ माना जाता है।

2. शंकराचार्य ने किस भाषा में ग्रंथ रचे थे?

शंकराचार्य ने संस्कृत भाषा में ग्रंथ रचे थे।

3. क्या शंकराचार्य ने समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान दिया था?

हां, शंकराचार्य ने समाज सेवा के क्षेत्र में योगदान दिया था।

4. शंकराचार्य के जीवन के अंत में क्या हुआ था?

शंकराचार्य के जीवन के अंत में उन्होंने संसार से त्याग कर दिया और संन्यास लेने का निर्णय लिया था।

5. शंकराचार्य के उपदेश क्यों महत्वपूर्ण हैं?

शंकराचार्य के उपदेश समाज को धार्मिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं और लोगों को सच्चे ज्ञान की ओर प्रोत्साहित करते हैं।

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