मैथिलीशरण गुप्त का जीवन परिचय- Maithilisharan gupt ka jivan parichay

मैथिलीशरण गुप्त, भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण नाम हैं। उन्हें ‘रष्ट्रकवि’ के रूप में भी जाना जाता है। उनका जन्म १८८६ में हुआ था और उनकी मृत्यु १९६९ में हुई थी।

बचपन और शिक्षा

मैथिलीशरण गुप्त का जन्म बिहार के मुझफ्फरपुर जिले में हुआ था। उनका बचपन उनके लेखनीय प्रतिभा की शुरुआत था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मुझफ्फरपुर में पूरी की और फिर कॉलेज की पढ़ाई भी वहीं से की।

साहित्यिक करियर

काव्य की दुनिया में कदम

मैथिलीशरण गुप्त ने अपने कविताओं के माध्यम से भारतीय समाज की समस्याओं को छूने का प्रयास किया। उनका काव्य उनके आदर्शवादी विचारों को प्रकट करता है और उन्होंने राष्ट्रीय भावनाओं को अपने शब्दों में अद्वितीय रूप से व्यक्त किया।

“जयशंकर प्रसाद” के साथ मित्रता

मैथिलीशरण गुप्त और “जयशंकर प्रसाद” की मित्रता साहित्यिक जगत में मशहूर है। उन्होंने मिलकर नई काव्यधारा की शुरुआत की और “चाया” के साथ एक नया साहित्यिक युग आरंभ किया।

विशेषणीय योगदान

रचनाएँ और कृतियाँ

मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख रचनाएँ उनकी काव्य-संग्रह “भरत-भारती” में संकलित हैं। इसमें उनकी रचनाओं ने भारतीय समाज के मुद्दों पर गहरा प्रभाव डाला है।

राष्ट्रीय भावनाओं की प्रतीक

मैथिलीशरण गुप्त की कविताओं में भारतीय राष्ट्रीयता और स्वतंत्रता संग्राम की भावनाएँ प्रधान हैं। उन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से जन-जन को समर्पित किया और उन्होंने अपने शब्दों से देशभक्ति की भावना को बढ़ावा दिया।

समापन

मैथिलीशरण गुप्त एक महान कवि और लेखक थे, जिन्होंने अपनी कविताओं के माध्यम से भारतीय समाज को प्रेरित किया और उनकी रचनाएँ आज भी हमें उनके विचारों का परिचय देती हैं।

5 अद्वितीय पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. क्या मैथिलीशरण गुप्त का कोई और साहित्यिक योगदान था?
  2. उनकी मृत्यु कब हुई और उनके निधन का कारण क्या था?
  3. “रष्ट्रकवि” के उपनाम से किसे जाना जाता है?
  4. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म कहाँ हुआ था?
  5. उनके प्रमुख काव्य-संग्रह का नाम क्या है?

इस आलेख से आपने मैथिलीशरण गुप्त के जीवन और योगदान के बारे में जानकारी प्राप्त की है। उनके शब्दों का महत्वपूर्ण संदेश आज भी हमें प्रेरित करता है।

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