भारत का सबसे महान राजा- Bharat ka sabse mahan raja

सम्राट अशोक भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण शासक थे, जो मौर्य वंश के सम्राट थे। उनका शासनकाल लगभग 268 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व तक रहा। अशोक को भारतीय इतिहास का सबसे महान राजा माना जाता है और उनके शासनकाल को धर्मशोक के नाम से भी जाना जाता है। उनके धर्मनिरपेक्षता और अहिंसा के प्रचार-प्रसार के लिए भी उन्हें याद किया जाता है।

बाल्यकाल का संघर्ष:

सम्राट अशोक का जन्म मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य और रानी दुर्गा के घर हुआ था। उनका बचपन विशाल अनाथालय में बिता, जहां से उन्हें राजमहल लाया गया। चंद्रगुप्त मौर्य ने अशोक को आत्मसंयम, युद्ध और राजनीति में शिक्षित किया था। बाल्यकाल में ही अशोक ने संघर्ष की शिक्षा प्राप्त की और राजमहल की सरकारी समृद्धि का अनुभव किया।

सम्राट अशोक का शासन:

मौर्य वंश के बादशाह बिंदुसार के बाद अशोक ने सिंहासन संभाला। उनका शासन स्थिरता और न्यायप्रिय शासन के लिए जाना जाता है। उन्होंने समृद्धि के लिए अपार प्रयास किये और उन्हें भारतीय इतिहास में एक सशक्त शासक के रूप में याद किया जाता है।

धर्मशोक और अहिंसा का प्रचारक:

सम्राट अशोक को धर्मशोक के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान धर्म को प्रमुखता दी। उन्होंने बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया और अहिंसा के मूल्य को प्रमोट किया। उन्होंने धर्म संबंधी निर्देशक अशोकावधान का प्रसार किया और धर्मिक स्थलों को समर्थन प्रदान किया।

धर्मविजयी यात्राएँ:

सम्राट अशोक को धर्म विजेता भी माना जाता है, क्योंकि उन्होंने धर्म को विभिन्न भागों में फैलाया। उन्होंने सर्वाधिक धर्मिक यात्राओं में से एक के रूप में कुमारग्राम (कुमारी की यात्रा) को निर्देशित किया। उन्होंने विभिन्न धर्मिक लोगों से मिलकर अपने धर्म को प्रसार किया और धर्म विजयी बनाने का प्रयास किया।

कला और संस्कृति का प्रचारक:

सम्राट अशोक को कला और संस्कृति के प्रचारक के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने भारतीय कला और संस्कृति को समर्थन किया और उन्हें विश्वभर में प्रसारित किया। उन्होंने स्थानीय शिल्पकला का समर्थन किया और कला के क्षेत्र में नए विकास के लिए प्रोत्साहित किया।

सम्राट अशोक के अन्तिम वर्ष:

सम्राट अशोक के जीवन के अंतिम वर्ष काफी विपरीत रहे। उनके शासनकाल के आखिरी दिनों में, वे अपने प्रियतम पुत्र महेंद्र और संगमित्रा के निधन का सामना करने के लिए असमर्थ हुए। इससे उन्हें गहरा दुख हुआ और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर असर पड़ा। अशोक का शासनकाल लगभग 40 वर्ष तक चला, और उनके मरने के बाद उनके पुत्र दशरथ मौर्य ने सिंहासन संभाला।

उपलब्धि और प्रशासनिक योजनाएँ:

सम्राट अशोक के शासनकाल में, उन्होंने अपने प्रशासनिक योजनाओं और उपलब्धियों के लिए भी ख्याति प्राप्त की। उन्होंने सत्याग्रह, अहिंसा, धर्म और शांति को अपने सम्राट्य में मूल्य स्थान दिया। उन्होंने अपने शासनकाल में सड़कों का निर्माण, सरकारी योजनाओं की शुरुआत, और जनता के हित में समृद्धि के लिए काम किया।

सम्राट अशोक की महत्वपूर्ण विचारधारा:

सम्राट अशोक को भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है, क्योंकि उन्होंने अहिंसा, धर्म, और शांति के प्रचार-प्रसार के लिए प्रयास किया। उनका संदेश आज भी लोगों के दिलों में बसा हुआ है। उन्होंने धर्म विजयी के रूप में अपने देश की भूमि पर अहिंसा के मूल्य को प्रमोट किया। उन्होंने लोगों को एक-दूसरे के साथ सद्भावना और समरसता की भावना से जीने की सीख दी।

आज की दुनिया में सम्राट अशोक का संदेश:

आज की दुनिया में सम्राट अशोक का संदेश भी उपयोगी है और लोगों के लिए प्रेरणादायक है। उनके धर्मशोक के मूल्यों की बात आज भी लोगों के दिलों में गहरी है। उन्होंने वैशिष्ट्य और समरसता के साथ एकजुट होने का संदेश दिया और लोगों को धार्मिक अनुशासन की अहमियत को समझाया। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, उनके संदेश ने एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई है और लोगों को सच्चे मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित किया है।

निष्कर्ष:

भारत का सबसे महान राजा, सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में धर्म, अहिंसा, और शांति के महत्व को प्रमोट किया। उनका संदेश आज भी हमें एकजुट होने, सच्चे धर्म के प्रति समर्पित होने, और अहिंसा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। उनके धर्मशोक के नाम से जाने जाने वाले इस महान शासक की याद आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है।

प्रश्न-उत्तर:

1. सम्राट अशोक का जन्म कब हुआ था?

सम्राट अशोक का जन्म मौर्य वंश के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य और रानी दुर्गा के घर हुआ था। उनका जन्म सन् 304 ईसा पूर्व में हुआ था।

2. सम्राट अशोक का शासनकाल कितने वर्ष तक रहा?

सम्राट अशोक का शासनकाल लगभग 36 वर्ष तक रहा। उनका शासनकाल लगभग 268 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व तक रहा।

3. सम्राट अशोक ने किस धर्म का प्रचार-प्रसार किया?

सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने धर्मशोक के नाम से भी जाना जाता है।

4. सम्राट अशोक ने किन-किन यात्राओं को निर्देशित किया?

सम्राट अशोक ने कुमारग्राम (कुमारी की यात्रा) और धर्मविजयी यात्राएँ निर्देशित की।

5. आज की दुनिया में सम्राट अशोक का संदेश क्या है?

आज की दुनिया में सम्राट अशोक का संदेश है कि हमें धर्मशोक के मूल्यों का सम्मान करना चाहिए और उनके धर्मशोक के नाम से जाने जाने वाले इस महान शासक की याद को जीवंत रखना चाहिए।

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