भारतेन्दु युग की विशेषता- Bhartendu yug ki visheshta

भारतीय साहित्य उसकी विविधता और धरोहर के लिए जाना जाता है। इसमें वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत सहित नाटक, कहानी, कविता आदि कई रूपांतरणों में विद्यमान है। भारतीय साहित्य का इतिहास विभिन्न युगों में बांटा जा सकता है। भारतेन्दु युग भारतीय साहित्य के उत्कृष्टतम युगों में से एक है, जो कि भारतीय साहित्य की विशेषता के आधार पर अपनी महत्ता रखता है। इस लेख में, हम भारतेन्दु युग की विशेषता को विस्तार से समझेंगे और इसके लोकप्रियता के कारणों का पता लगाएंगे।

भारतेन्दु युग का उदय

भारतेन्दु युग ने 19वीं सदी से लेकर 20वीं सदी के प्रारंभ तक भारतीय साहित्य के विकास में एक सुगम मोड़ लाया। इस युग में भाषा, साहित्यिक धाराएं और विचारों में बदलाव देखने को मिला। सबसे प्रमुख कारण थे राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद सरस्वती, रवींद्रनाथ टैगोर, प्रेमचंद, भारतेन्दु हरिश्चंद्र एवं महावीर प्रसाद द्वारा लिखित साहित्य जो इस युग को अद्भुत बनाते हैं।

भारतेन्दु युग की विशेषताएँ

1. समाजिक सुधार

भारतेन्दु युग एक सामाजिक सुधार के युग के रूप में प्रसिद्ध है। इस युग में सामाजिक अंधविश्वासों का सामना किया गया और समाज में बदलाव के लिए प्रयास किए गए। स्त्री सशक्तिकरण, शिक्षा को प्राथमिकता देना, जाति-प्रथा के खिलाफ आवाज उठाना इस युग के महत्वपूर्ण मुद्दे थे।

2. भाषा का महत्व

भाषा और साहित्य इस युग में विशेष महत्व रखते थे। भारतेन्दु युग के साहित्यिक ने भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित किया और उन्हें साहित्य का माध्यम बनाया। हिंदी को समाज में स्वीकार्य बनाने के लिए उनके प्रयास महत्वपूर्ण थे।

3. प्राकृतिकता का प्रेम

भारतेन्दु युग के साहित्यिक आंदोलन में प्राकृतिकता का प्रेम व्यक्त होता है। वे प्रकृति के सौंदर्य को गान करते हैं और मानव-प्राकृतिकता के संबंध को अपने लेखन में दर्शाते हैं।

भारतेन्दु युग के प्रसिद्ध साहित्यकार

1. भारतेन्दु हरिश्चंद्र

भारतेन्दु हरिश्चंद्र भारतीय साहित्य के एक प्रसिद्ध लेखक थे। उनका लेखन सामाजिक सुधार को प्रोत्साहित करता था और वे भारतीय साहित्य के इस युग के शिखर पर थे।

2. महावीर प्रसाद

महावीर प्रसाद भारतेन्दु युग के अन्य एक लोकप्रिय साहित्यकार थे। उनकी कविताएं और कहानियां लोगों के दिलों में छाई रहती थीं।

नए युग का आगमन

भारतेन्दु युग के बाद भारतीय साहित्य में एक नया युग आया, जिसमें भारतीय संस्कृति, भाषा, और साहित्य में एक नया अध्याय शुरू हुआ। इस नए युग में भारतीय साहित्यकार विदेशों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं और साहित्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को विश्व में प्रचारित कर रहे हैं।

निष्कर्ष

भारतेन्दु युग भारतीय साहित्य के विकास का एक महत्वपूर्ण अध्याय था। इस युग में सामाजिक सुधार, भाषा का महत्व, और प्राकृतिकता के प्रेम को महत्व दिया गया था। भारतेन्दु युग के कवियों ने भारतीय साहित्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाया। इस युग के साहित्यिक अद्भुत उपलब्धियों ने भारतीय साहित्य को विश्व में पहचान दिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. भारतेन्दु युग कब था?

भारतेन्दु युग 19वीं सदी से लेकर 20वीं सदी के प्रारंभ तक का एक समयावधि था।

2. भारतेन्दु युग में कौन-कौन से साहित्यकार थे?

भारतेन्दु युग में भारतीय साहित्य के कई प्रमुख साहित्यकार थे, जैसे कि भारतेन्दु हरिश्चंद्र और महावीर प्रसाद।

3. भारतेन्दु युग का महत्व क्या था?

भारतेन्दु युग भारतीय साहित्य के विकास में एक महत्वपूर्ण अध्याय था जिसमें सामाजिक सुधार, भाषा का महत्व, और प्राकृतिकता के प्रेम को बढ़ावा दिया गया।

4. भारतेन्दु युग के साहित्यिक किस्से क्या हैं?

भारतेन्दु युग के साहित्यिक किस्से समाज के विभिन्न पहलुओं पर आधारित थे। इस युग के साहित्यिक लेखक समाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों को उठाते थे।

5. भारतेन्दु युग के साहित्य में क्या सबसे विशेष था?

भारतेन्दु युग के साहित्य में सबसे विशेष था उसका समाजिक और प्राकृतिकता के प्रति प्रेम और संवेदनशीलता। इस युग के साहित्यकार भारतीय समाज की समस्याओं को खुलकर समझने का प्रयास करते थे।

इस लेख के माध्यम से हमने भारतेन्दु युग की विशेषता और महत्व को देखा है। यह युग भारतीय साहित्य के विकास के लिए एक गर्वशाली अध्याय रहा है। इस युग के साहित्यिक उपलब्धियों ने भारतीय संस्कृति को एक नया परिचय दिया। आइए, हम इसे गर्व से याद करें और इस साहित्यिक युग के महान कवियों का आभार भाव दें।

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