ब्रूनर का सिद्धांत- Bruner ka siddhant

ब्रूनर का सिद्धांत एक महत्वपूर्ण शिक्षा-मनोविज्ञानिक सिद्धांत है जो शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले अमेरिकी शिक्षाविद, जेरोम ब्रूनर ने विकसित किया था। इस सिद्धांत के माध्यम से, उन्होंने शिक्षा को समझने और इसे बेहतर बनाने के लिए मानव मनोवैज्ञानिक तत्वों को शामिल किया। इस लेख में, हम ब्रूनर के सिद्धांत के महत्वपूर्ण पहलुओं को विस्तार से जानेंगे।

ब्रूनर के सिद्धांत की अवधारणा (Concept of Bruner’s Theory)

जेरोम ब्रूनर का सिद्धांत मनोवैज्ञानिक प्रक्रियाओं पर आधारित है जो शिक्षा में ज्ञान प्राप्ति को समझाने का प्रयास करता है। इस सिद्धांत के अनुसार, शिक्षा के विभिन्न तत्व ज्ञान को स्वीकार करने और समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहां हम ब्रूनर के सिद्धांत के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझेंगे:

संरचनात्मक समझ (Constructivist Learning)

ब्रूनर का सिद्धांत संरचनात्मक समझ की मानक रूप में परिचित है। इसे उन्होंने ‘संरचना तंत्रिका’ के रूप में जाना जाता है। इसका मतलब है कि विद्यार्थी नए ज्ञान को अपने पहले ज्ञान और अनुभवों के साथ जोड़कर समझते हैं। इस प्रक्रिया में, विद्यार्थियों को गहन रूप से समझाने के लिए उनके पूर्व ज्ञान को उन्नत स्तर तक पहुंचाया जाता है।

प्रवृत्ति का सिद्धांत (Principle of Predisposition)

ब्रूनर का सिद्धांत प्रवृत्ति का महत्वपूर्ण ध्येय करता है। इसके अनुसार, शिक्षा को प्रभावित करने में विद्यार्थियों की प्रवृत्ति एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह सिद्धांत कहता है कि शिक्षकों को विद्यार्थियों के रूचि, अभिरुचि, और प्राथमिक ज्ञान को ध्यान में रखकर पाठ योजना बनानी चाहिए।

ब्रूनर के सिद्धांत के अनुसार शिक्षा का महत्व (Importance of Education According to Bruner’s Theory)

ब्रूनर का सिद्धांत शिक्षा के क्षेत्र में अपार योगदान करता है। इसके माध्यम से, शिक्षा को आसानी से समझने की तकनीकें विकसित की जाती हैं, जो विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया को रोचक बनाती हैं। ब्रूनर के सिद्धांत के कुछ महत्वपूर्ण फायदे निम्नलिखित हैं:

अधिगम की गहराई (Depth of Learning)

ब्रूनर के सिद्धांत में संरचनात्मक समझ का प्रयोग करके, विद्यार्थी विषय को गहराई से समझते हैं और उसे अपने दिमाग में स्थायी रूप से संग्रहीत करते हैं। इससे उन्हें विषय के प्रति रूचि बढ़ती है और वे उसे समझने में विशेषज्ञता प्राप्त करते हैं।

समृद्धि का विकास (Development of Abundance)

ब्रूनर के सिद्धांत में प्रवृत्ति के सिद्धांत के अनुसार, शिक्षा विद्यार्थियों की प्राथमिक ज्ञान और रूचि के आधार पर आधारित होती है। इससे वे उन विषयों में अधिक समृद्धि प्राप्त करते हैं जिन्हें वे पसंद करते हैं और जिनमें उनकी प्राथमिकता होती है।

समाप्ति (Conclusion)

ब्रूनर का सिद्धांत शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मानव मनोविज्ञानिक सिद्धांत है जो विद्यार्थियों के लिए अधिगम को समझने और समृद्धि को विकसित करने में मदद करता है। इसके माध्यम से, शिक्षक विद्यार्थियों के रूचि और प्राथमिक ज्ञान को ध्यान में रखकर सीखने की प्रक्रिया को रोचक बना सकते हैं।


अकस्मात पूछे जाने वाले प्रश्न

1. ब्रूनर कौन थे और उनका सिद्धांत क्या है?

ब्रूनर एक अमेरिकी शिक्षाविद थे जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में ब्रूनर का सिद्धांत विकसित किया था। उनके सिद्धांत में संरचनात्मक समझ और प्रवृत्ति के महत्वपूर्ण तत्व शामिल होते हैं।

2. ब्रूनर के सिद्धांत का उपयोग किस प्रकार होता है?

ब्रूनर के सिद्धांत का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों को अधिगम को समझने और समृद्धि को विकसित करने में किया जाता है। इसके माध्यम से शिक्षक विभिन्न शिक्षा-प्रदान के तरीके अपना सकते हैं जो विद्यार्थियों के लिए आसान और समझने योग्य होते हैं।

3. ब्रूनर के सिद्धांत की अवधारणा क्या है?

ब्रूनर के सिद्धांत में संरचनात्मक समझ की अवधारणा होती है, जिसमें विद्यार्थी नए ज्ञान को अपने पहले ज्ञान और अनुभवों के साथ जोड़कर समझते हैं। इससे उन्हें विषय के प्रति रूचि और गहराई से समझने की क्षमता मिलती है।

4. शिक्षा में ब्रूनर के सिद्धांत का प्रयोग किन-किन तरीकों से किया जा सकता है?

ब्रूनर के सिद्धांत का प्रयोग शिक्षा में समृद्धि को विकसित करने के लिए विभिन्न शिक्षा-प्रदान के तरीकों में किया जा सकता है। शिक्षक विभिन्न प्राधिकरणों और उदाहरणों का उपयोग करके विद्यार्थियों को अधिगम को समझने में मदद कर सकते हैं।

5. ब्रूनर के सिद्धांत का महत्व क्या है?

ब्रूनर के सिद्धांत का महत्व शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के समझने और समृद्धि को विकसित करने में है। इसके माध्यम से शिक्षक विभिन्न तरीकों से विद्यार्थियों को सीखने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जो उन्हें सीखने के प्रक्रिया को रोचक बनाता है।

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