प्लासी युद्ध- Plasi war in hindi

प्लासी युद्ध भारतीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण अध्याय में से एक है जिसमें ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ लड़ी गई थी। यह युद्ध 22 जून, 1757 को बंगाल के प्लासी में हुआ था, जिसमें भारतीय सैन्य की शानदार जीत के साथ शूरवीरता का परिचय हुआ। इस लेख में हम प्लासी युद्ध के इतिहास, कारण, विविधता, और परिणामों को विस्तार से देखेंगे।

युद्ध की शुरुआत

ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार

प्लासी युद्ध से पहले, ब्रिटिश साम्राज्य ने भारत में अपने क्षेत्र को विस्तारित किया था। ईस्ट इंडिया कंपनी के नेतृत्व में ब्रिटिश ने भारतीय राजा-महाराजाओं से सन्धि करके उनके सामंजस्यपूर्ण राज्यों को अपने अधीन किया था। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि ब्रिटिश को भारत के व्यापार और संसाधनों का लाभ होता था।

सिरफिरा राजा सिरजुद्दौला

ब्रिटिश के विस्तार के बीच, बंगाल के नवाब सिरजुद्दौला ब्रिटिश के साथ सहमत नहीं थे। वे ईस्ट इंडिया कंपनी की संपत्ति और राजनीतिक दखल के खिलाफ थे और इसलिए ब्रिटिश उन्हें हटाने का प्रयास कर रहे थे।

प्लासी युद्ध का परिप्रेक्ष्य

ब्रिटिश का चुनौती प्रस्ताव

प्लासी युद्ध के पहले, ब्रिटिश के सैन्य नेता रॉबर्ट क्लाइव ने सिरजुद्दौला को बातचीत के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने उन्हें विश्वास दिलाया कि वे उनके राजस्व को सुरक्षित रखेंगे और सैन्य को वापस भेज देंगे। इसके बदले में, सिरजुद्दौला को ब्रिटिश के साम्राज्य की नौकरी मिल सकती थी।

कोयला की घोटाला

कोलकाता में स्थित ईस्ट इंडिया कंपनी के गोदाम में रखे हुए कोयले के बारे में एक बड़ा घोटाला हुआ था। सिरजुद्दौला को लगा कि ब्रिटिश ने उन्हें धोखा दिया और उनके सामंजस्यपूर्ण राज्य को छीन लिया। इससे उनका क्रोध बढ़ा और उन्होंने ब्रिटिश के खिलाफ युद्ध का एलान किया।

युद्ध का आयोजन

सैन्य समर्पण

प्लासी में युद्ध के आयोजन में, सिरजुद्दौला के साथ उनके मित्र नवाब शाहालाम भी थे। इसके अलावा, उनके पास बड़ी संख्या में सैन्य होने के कारण उन्होंने ब्रिटिश को भीड़ वाले जंग में हराने का प्रयास किया। वह इस युद्ध को अपने लाभ के लिए एक मौका मान रहे थे।

ब्रिटिश सैन्य की योजना

ब्रिटिश ने युद्ध के लिए एक धार्मिक तरीका अपनाया था। उन्होंने अपने सैन्य को तीन अलग-अलग टुकड़ों में विभाजित किया था जिससे वे युद्ध के तीन अलग-अलग दृश्यों में दिखाई दे सकते थे। इससे सिरजुद्दौला को भ्रमित करने का प्रयास किया गया था और ब्रिटिश ने उन्हें एकांतवास में आकर्षित किया था।

लड़ाई का दृश्य

भारतीय सैन्य की शानदार जीत

प्लासी के युद्ध के दृश्य में भारतीय सैन्य की शानदार जीत देखने को मिली। उन्होंने ब्रिटिश को हराया और उनके सैन्य को पूरी तरह से भगा दिया। ब्रिटिश सेनानियों की दुर्दशा ने उन्हें भयभीत कर दिया और उनके मन में जीत की उम्मीद तब तक बरकरार रही जब तक कि रॉबर्ट क्लाइव के द्वारा अधिक सैन्य भेजे जाने की खबर न मिली।

युद्ध के परिणाम

प्लासी संधि

प्लासी युद्ध के परिणामस्वरूप, ब्रिटिश को एक ठीक समझौता करने की आवश्यकता महसूस हुई। युद्ध के बाद, प्लासी संधि हस्तांतरित की गई, जिसमें सिरजुद्दौला ने अधिकार का त्याग किया और ब्रिटिश ने बंगाल के शासन को स्वीकारा। इससे ब्रिटिश के साम्राज्य का विस्तार और मजबूती हुई।

निष्कर्ष

प्लासी युद्ध भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी जो ब्रिटिश साम्राज्य की प्राकृतिक सुदृढ़ता को चुनौती देती थी। यह युद्ध भारतीय सैन्य की शौर्य और लड़ाई की भावना को प्रतिष्ठित करता है। आज भी प्लासी युद्ध का स्मरण भारतीय इतिहास में जीवंत है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

  1. प्लासी युद्ध कब हुआ था?
    • प्लासी युद्ध 22 जून, 1757 को हुआ था।
  2. युद्ध के परिणामस्वरूप क्या हुआ?
    • प्लासी संधि के परिणामस्वरूप, सिरजुद्दौला ने अधिकार का त्याग किया और ब्रिटिश ने बंगाल के शासन को स्वीकारा।
  3. युद्ध में भारतीय सैन्य की क्या भूमिका थी?
    • प्लासी युद्ध में भारतीय सैन्य ने ब्रिटिश को हराया और उनके सैन्य को पूरी तरह से भगा दिया।
  4. युद्ध का परिणाम भारतीय इतिहास में क्यों महत्वपूर्ण है?
    • प्लासी युद्ध भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे भारतीय सैन्य की शौर्य और लड़ाई की भावना को प्रतिष्ठित किया गया था।
  5. प्लासी युद्ध की संधि कब हस्तांतरित की गई थी?
    • प्लासी संधि युद्ध के परिणामस्वरूप हस्तांतरित की गई थी।

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