दादाभाई नौरोजी- Dadabhai naoroji in hindi

दादाभाई नौरोजी, एक प्रख्यात आधुनिक भारतीय राजनेता, आर्थशास्त्री, विचारक और स्वतंत्रता सेनानी थे। वे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख प्रेरणा स्रोत थे और उनका योगदान भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण है। नौरोजी ने अपने जीवन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक में से एक के रूप में काम किया और उन्होंने ब्रिटिश शासन के विरोध में सशक्त भूमिका निभाई।

नौरोजी का जीवन परिचय

दादाभाई नौरोजी का जन्म 4 सितंबर 1825 को भारत के नवसारी नामक स्थान पर हुआ था। उन्होंने विद्यार्थी जीवन में आर्थिक समस्याओं के कारण उच्चतर शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाईयों का सामना किया। तथापि, उन्होंने यह लक्ष्य प्राप्त किया और लंदन में आर्थिक आयोग के सदस्य के रूप में काम करने का अवसर प्राप्त किया।

नौरोजी का भारतीय राजनीतिक संघर्ष

नौरोजी का भारतीय राजनीतिक संघर्ष उनके पश्चात्ताप काल से प्रारंभ हुआ, जब उन्होंने अपने मातृभूमि के लिए लड़ने का निर्णय लिया। वे अंग्रेजों की नीतियों के विरोध में आवाज बुलंद करने लगे और भारतीयों के अधिकारों की मांग करने में विशेष रूप से सक्रिय हुए। उन्होंने समाज में जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न अद्यतनों और आंदोलनों का आयोजन किया।

नौरोजी के योगदान

नौरोजी के योगदान में सबसे महत्वपूर्ण उनकी प्राथमिकता थी भारतीयों के अधिकारों की आवाज उठाना। वे न्याय और समानता के लिए लड़ने में सशक्त हुए और इसके लिए विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसका उद्घाटन 1885 में बोम्बे में हुआ।

नौरोजी की महत्वपूर्ण ग्रंथ

नौरोजी ने अपने जीवन के दौरान कई महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना की। उनकी पुस्तक “पोवर्टी और आन्दोलन” भारतीय अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके अलावा, उनकी और भी कई पुस्तकें हैं जो उनके विचारों और आदर्शों को समर्पित हैं।

नौरोजी के विचार और आदर्श

दादाभाई नौरोजी के विचारों और आदर्शों में न्याय, समानता, और स्वतंत्रता के महत्व को उठाया गया। उन्होंने अपने जीवन के दौरान लोगों को जागरूक करने के लिए सभी वर्गों के बीच एकता को बढ़ावा दिया। उन्होंने आर्थिक न्याय के मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया और अंग्रेज शासन के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था की विपन्नता का मुद्दा उठाया।

नौरोजी की मृत्यु और उपलब्धियाँ

दादाभाई नौरोजी की मृत्यु 30 जून 1917 को हुई। उन्होंने अपने जीवन के दौरान अनेक उपलब्धियों को हासिल किया। उन्हें “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस” का शीर्ष अध्यक्ष का पद भी सौंपा गया था। उन्हें 1906 में ब्रिटिश संसद के सदस्य के रूप में चुना गया था, जिसका उन्होंने स्वीकार किया।

नौरोजी के प्रतिष्ठानिक पहचान

दादाभाई नौरोजी को “भारतीय राष्ट्रीय विद्यापीठ” द्वारा प्रतिष्ठित किया गया है। यह पहला ऐसा प्रतिष्ठान है जिसने उनके नाम की स्मृति बनाई है। यह विद्यापीठ देश भर में विभिन्न क्षेत्रों में उच्चतर शिक्षा को संवारने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

निष्कर्ष

दादाभाई नौरोजी एक महान व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपने जीवन के दौरान देश के लिए काम किया और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके विचारों, आदर्शों और कार्यों की प्रेरणा से देश में गर्व की भावना जागृत हुई और आज भी उनकी स्मृति और योगदान को सम्मान मिलता है।

अद्वितीय प्रश्नोत्तर

1. दादाभाई नौरोजी का जन्म स्थान क्या है?

उत्तर: दादाभाई नौरोजी का जन्म स्थान नवसारी, भारत है।

2. नौरोजी ने किस कार्यक्रम की स्थापना की थी?

उत्तर: नौरोजी ने “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस” की स्थापना की थी।

3. दादाभाई नौरोजी किस क्षेत्र में प्रमुख योगदान दिया?

उत्तर: दादाभाई नौरोजी ने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

4. नौरोजी की मृत्यु कब हुई?

उत्तर: दादाभाई नौरोजी की मृत्यु 30 जून 1917 को हुई।

5. नौरोजी की पहचान किस प्रतिष्ठान द्वारा की गई है?

उत्तर: दादाभाई नौरोजी की पहचान “भारतीय राष्ट्रीय विद्यापीठ” द्वारा की गई है।

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