कोहलबर्ग की सिद्धांत- Kohlberg theory in hindi

व्यक्ति के विकास में नैतिकता और मूल्यों का ख्याल रखने का सिद्धांत विभिन्न चर्चाओं का विषय रहा है। उन्होंने विकास के इस संदर्भ में कोहलबर्ग ने अपना खुद का सिद्धांत विकसित किया है, जो नैतिक विकास के मापदंडों को समझने में मदद करता है। इस लेख में, हम कोहलबर्ग के सिद्धांत की एक संक्षेपित जानकारी प्रदान करेंगे और इसका महत्व समझेंगे।

लेख: कोहलबर्ग का सिद्धांत – नैतिक विकास का मार्गदर्शक

विभिन्न सिद्धांतों ने व्यक्ति के नैतिक विकास के मार्ग में मदद की है, और कोहलबर्ग का सिद्धांत भी इनमें से एक है। वे विकास के सात स्तर निर्धारित करते हैं, जिनसे हम अपने नैतिकता के स्तर को समझ सकते हैं।

कोहलबर्ग के सिद्धांत का परिचय करते हुए, पहले स्तर पर हम सुलभता और उपयोग के पदार्थों में अपने नैतिक अनुभवों का सामना करते हैं। यह नैतिकता के प्राथमिक स्तर को दर्शाता है जहां हम अपने अभिव्यक्ति के माध्यम से नैतिक मूल्यों को समझने लगते हैं।

दूसरे स्तर पर हम व्यक्तिगत स्वार्थ के प्रति ज्यादा जागरूक होते हैं, जो हमें समझने के लिए प्रेरित करता है कि हमारे कार्य और कर्तव्य कैसे हमारे अपने लाभ को पूरा कर सकते हैं।

सामाजिक जीवन में सहायता करने के लिए तैयार होने पर हम तीसरे स्तर पर पहुंचते हैं। यहां पर हमें समाज के प्रति जिम्मेदारी का अहसास होता है, और हम सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए कदम उठाते हैं।

संगठनात्मक समानता के प्रति जागरूकता विकसित करने पर हम चौथे स्तर पर पहुंचते हैं, जहां हम संगठन के भीतर मानवीय समानता के महत्व को समझते हैं।

आगे बढ़ते हुए, हम पांचवे स्तर पर समाजवादी संरचना के समर्थन में रुचि दिखाते हैं, जो समाज में न्यायपूर्ण संरचना को प्रोत्साहित करता है।

छठे स्तर पर हम व्यावसायिक नैतिकता के मानकों का अनुसरण करते हैं, जो हमें व्यवसायिक संदर्भ में नैतिक निर्णय लेने में मदद करता है।

अंत में, सातवें स्तर पर हम वैशिष्ट्यकरण की अधिकता हासिल करते हैं, जिसमें हमारे नैतिक मान्यता का स्तर उच्च होता है।

कोहलबर्ग के सिद्धांत के महत्व को समझते हुए, इस सिद्धांत का महत्वपूर्ण योगदान है कि यह हमें अपने नैतिक और सामाजिक मूल्यों के साथ सबल बनाता है। यह हमें समाज के प्रति जिम्मेदारी और सहानुभूति की भावना विकसित करने में मदद करता है।

समापन

कोहलबर्ग का सिद्धांत नैतिक विकास के मार्गदर्शक रहा है। इस सिद्धांत के सात स्तर हमें अपने नैतिकता के विकास के प्रति जागरूक करते हैं। हमें समाज के प्रति जिम्मेदारी का अहसास होता है और हम सामाजिक समस्याओं को हल करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इस तरीके से, हम एक उत्कृष्ट समाज और समृद्धि की दिशा में अग्रसर होते हैं।

प्रश्न-उत्तर

1. कोहलबर्ग का सिद्धांत क्या है?

कोहलबर्ग का सिद्धांत व्यक्ति के नैतिक विकास के सात स्तर निर्धारित करता है जो उसके नैतिक मूल्यों को समझने में मदद करते हैं।

2. सिद्धांत के पहले स्तर में क्या होता है?

सिद्धांत के पहले स्तर में व्यक्ति सुलभता और उपयोग के पदार्थों में अपने नैतिक अनुभवों का सामना करता है।

3. क्या कोहलबर्ग के सिद्धांत का महत्व है?

हां, कोहलबर्ग के सिद्धांत का महत्व है क्योंकि यह हमें अपने नैतिक और सामाजिक मूल्यों के साथ सबल बनाता है और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है।

4. कोहलबर्ग के सिद्धांत के कितने स्तर हैं?

कोहलबर्ग के सिद्धांत में सात स्तर होते हैं, जो व्यक्ति के नैतिक विकास के विभिन्न पहलुओं को दर्शाते हैं।

5. कोहलबर्ग के सिद्धांत कौनसे स्तर पर व्यावसायिक नैतिकता के मानकों का अनुसरण करते हैं?

कोहलबर्ग के सिद्धांत के छठे स्तर पर हम व्यावसायिक नैतिकता के मानकों का अनुसरण करते हैं, जो हमें व्यवसायिक संदर्भ में नैतिक निर्णय लेने में मदद करता है।

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