एलेक्जेंडर की कहानी- Alexander story in hindi

ऐतिहासिक व्यक्तियों में से एक नाम जो हमेशा याद किया जाता है, वह है अलेक्सेंडर महान, जिसे सिकंदर या एलेक्जेंडर भी कहा जाता है। उनकी कहानी एक अद्भुत सफलता, साहस, और सैन्य उपलब्धियों से भरी हुई है। उनके अभूतपूर्व युद्ध कौशल और राष्ट्र निर्माण में उनके प्रयासों को विवेचना अनिवार्य है। यह लेख एक दर्शनीय पथ प्रदान करता है जो हमें अलेक्सेंडर के संघर्षों, विजयों, और उनकी विलक्षणता को समझने में मदद करेगा।

एलेक्जेंडर का बचपन

एलेक्जेंडर का जन्म 356 ईसा पूर्व में मकेदोनिया के राजा पिलिप द्वितीय और रानी ओलिंपियाडा के यहां हुआ था। उनके बचपन का एक रोचक अंश था, जब उनकी मां ने एक दिन एक ब्राह्मण को उनके भविष्य के बारे में पूछा। ब्राह्मण ने अलेक्सेंडर की भविष्यवाणी की थी कि उन्हें बहुत बड़ा और महान राजा बनने का धरोहर मिलेगा। इसे सुनकर पिलिप ने गर्व से भरकर अलेक्सेंडर को “सबलेक्सेंडर” नाम दिया, जिसका अर्थ था “संघर्ष के बाद महान”।

युवावस्था के अभियान

सबलेक्सेंडर की युवावस्था भरी थी एक साहसिक और रोमांचक यात्रा से। उनके पिता के आधीन, उन्हें विद्या, युद्ध, और धर्म की शिक्षा मिली। उन्हें लड़ाकू और वीरता के क्षेत्र में प्रशिक्षित किया गया था, जिससे उनमें नेतृत्व का जूनून और जोश उभरा। उनके गुरु और शिक्षक अरिस्टॉटल ने उन्हें दर्शनीय और दार्शनिक शिक्षा भी प्रदान की, जो उनके बुद्धिमान और उदार मनोभाव के विकास में मदद करी।

एलेक्जेंडर की विजय

वयस्क बनने पर, सबलेक्सेंडर ने अपने पिता के राज्य का उत्तराधिकारी बनने का सपना देखा। उन्होंने राज्य के विभिन्न हिस्सों में यात्राएँ की और विभिन्न राज्यों और सैन्यों के साथ संघर्ष किया। उनकी प्रतिभा, युद्ध कौशल, और नेतृत्व के कारण उन्होंने कई लड़ाईयों को जीता और अपने पिता के बाद उन्हें मकेदोनिया के राजा के रूप में स्वीकार किया गया।

सबलेक्सेंडर से महान अलेक्सेंडर तक

पिता की मृत्यु के बाद, अलेक्सेंडर ने अपनी अंदर की भूख को खुलकर बहार निकालना शुरू किया। उन्होंने राजा के रूप में न केवल मकेदोनिया के समृद्धि को बढ़ाया, बल्कि अपने साथियों के साथ भारत, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, एशिया, एबिसिनिया और ग्रीस जैसे कई राष्ट्रों की भी विजय प्राप्त की। वे एक समृद्ध और विशाल साम्राज्य के नेतृत्व में थे, जिसका क्षेत्रफल लगभग 5.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर था।

विजय के बाद का जीवन

एलेक्जेंडर की विजय के बाद, उन्होंने अपने राज्य की सुस्त और लवची जीवनशैली अपनाई। उन्हें विजयी शिक्षक और दार्शनिक के रूप में भी याद किया जाता है, और उन्होंने अपने शिक्षार्थियों को धर्म, नैतिकता, और नैतिक उच्चता के मामूले सिखाए। उन्होंने विभिन्न संस्थानों, नगरों, और स्तंभों का निर्माण किया और सैन्य ताकत को विकसित किया। उन्होंने अपने समय की एक सबसे बड़ी समुद्री यात्रा भी की, जो आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

एलेक्सेंडर का अंत

अपने 32 वर्ष की उम्र में, अलेक्सेंडर एक अपराधी ने उन्हें घातक रूप से घायल कर दिया। उनकी गंभीर चोट के चलते वे अपने पिता के पास वापस नहीं जा सके और उनके अंत के निकट उनके साथी और शिष्यों के साथ मृत्यु हो गई। एक बारगादी के रूप में आराम से पढ़ते हुए उनका साम्राज्य लगभग 13 साल चला था।

नागरिकों के दिलों में जीते हैं

एलेक्सेंडर की कहानी आज भी लोगों के दिलों में जीते हैं। उनकी बहादुरी, साहस, और नेतृत्व का उदाहरण आज भी महसूस होता है। उनकी कहानी हमें यह शिक्षा देती है कि सामर्थ्य, संघर्षशीलता, और धैर्य से हम किसी भी मुश्किल से मुकाबला कर सकते हैं और अपने लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं।

जीवन के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अलेक्सेंडर का जन्म कब हुआ था?

अलेक्सेंडर का जन्म 356 ईसा पूर्व में हुआ था।

2. अलेक्सेंडर का पिता कौन था?

अलेक्सेंडर के पिता का नाम राजा पिलिप द्वितीय था।

3. अलेक्सेंडर की विजय किस राज्य में हुई थी?

अलेक्सेंडर की विजय भारत, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान, एशिया, एबिसिनिया, और ग्रीस जैसे कई राष्ट्रों में हुई थी।

4. अलेक्सेंडर का समृद्ध साम्राज्य कितने क्षेत्रफल का था?

अलेक्सेंडर के समृद्ध साम्राज्य का क्षेत्रफल लगभग 5.2 मिलियन वर्ग किलोमीटर था।

5. अलेक्सेंडर का अंत कैसे हुआ?

अपने 32 वर्ष की उम्र में, अलेक्सेंडर एक अपराधी ने उन्हें घातक रूप से घायल कर दिया और उनके अंत के निकट उनके साथी और शिष्यों के साथ मृत्यु हो गई।

Leave a Comment